श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.7

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

नारद उवाच

भो भोः प्रजापते राजन् पशून् पश्य त्वयाध्वरे।

संज्ञापिताञ्जीवसङ्घान्‍निर्घृणेन सहस्रशः॥ ७

bho bhoḥ prajāpate rājan paśūn paśya tvayādhvare|

saṃjñāpitāñjīvasaṅghānnirghṛṇena sahasraśaḥ|| 7

अर्थ

श्रीनारदजीने कहा—देखो, देखो, राजन्! तुमने यज्ञमें निर्दयतापूर्वक जिन हजारों पशुओंकी बलि दी है—उन्हें आकाशमें देखो॥ ७॥

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