॥ श्रीहरिः ॥
भो भोः प्रजापते राजन् पशून् पश्य त्वयाध्वरे।
संज्ञापिताञ्जीवसङ्घान्निर्घृणेन सहस्रशः॥ ७
bho bhoḥ prajāpate rājan paśūn paśya tvayādhvare|
saṃjñāpitāñjīvasaṅghānnirghṛṇena sahasraśaḥ|| 7
अर्थ
श्रीनारदजीने कहा—देखो, देखो, राजन्! तुमने यज्ञमें निर्दयतापूर्वक जिन हजारों पशुओंकी बलि दी है—उन्हें आकाशमें देखो॥ ७॥
भो भोः प्रजापते राजन् पशून् पश्य त्वयाध्वरे।
संज्ञापिताञ्जीवसङ्घान्निर्घृणेन सहस्रशः॥ ७
श्रीनारदजीने कहा—देखो, देखो, राजन्! तुमने यज्ञमें निर्दयतापूर्वक जिन हजारों पशुओंकी बलि दी है—उन्हें आकाशमें देखो॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 534) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/7/