श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.71

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

योगादेशमुपासाद्य धारयन्तो मुनिव्रताः।

समाहितधियः सर्व एतदभ्यसतादृताः॥ ७१

yogādeśamupāsādya dhārayanto munivratāḥ|

samāhitadhiyaḥ sarva etadabhyasatādṛtāḥ|| 71

अर्थ

मैंने तुम्हें यह योगादेश नामका स्तोत्र सुनाया है। तुमलोग इसे मनसे धारणकर मुनिव्रतका आचरण करते हुए इसका एकाग्रतासे आदरपूर्वक अभ्यास करो॥ ७१॥✎ 415 1335

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #415 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में
  • #1335 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): करेेंगे॥ → करेंगे॥

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