आप पितर और देवताओंके पोषक सोम हैं तथा तीनों वेदोंके अधिष्ठाता हैं; हम आपको नमस्कार करते हैं, आप ही समस्त प्राणियोंको तृप्त करनेवाले सर्वरस (जल) रूप हैं; आपको नमस्कार है॥ ३८॥✎ 13331334
नम ऊर्ज इषे त्रय्याः पतये यज्ञरेतसे।
तृप्तिदाय च जीवानां नमः सर्वरसात्मने॥ ३८
आप पितर और देवताओंके पोषक सोम हैं तथा तीनों वेदोंके अधिष्ठाता हैं; हम आपको नमस्कार करते हैं, आप ही समस्त प्राणियोंको तृप्त करनेवाले सर्वरस (जल) रूप हैं; आपको नमस्कार है॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 528) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/24/38/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1333 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): अभि-व्यक्ति → अभिव्यक्ति
#1334 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): प्रकार-की → प्रकारकी