॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.24.27
श्रीरुद्र उवाच
यूयं वेदिषदः पुत्रा विदितं वश्चिकीर्षितम्।
अनुग्रहाय भद्रं व एवं मे दर्शनं कृतम्॥ २७
yūyaṃ vediṣadaḥ putrā viditaṃ vaścikīrṣitam|
anugrahāya bhadraṃ va evaṃ me darśanaṃ kṛtam|| 27
अर्थ
श्रीमहादेवजी बोले—तुमलोग राजा प्राचीनबर्हिके पुत्र हो, तुम्हारा कल्याण हो। तुम जो कुछ करना चाहते हो, वह भी मुझे मालूम है। इस समय तुमलोगोंपर कृपा करनेके लिये ही मैंने तुम्हें इस प्रकार दर्शन दिया है॥ २७॥