bhuvi lolāyuṣo ye vai naiṣkarmyaṃ sādhayantyuta|| 27
अर्थ
इस लोकमें कुछ ही दिनोंका जीवन होनेपर भी जो लोग भगवान्के परमपदकी प्राप्ति करानेवाला आत्मज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, उनके लिये संसारमें कौन पदार्थ दुर्लभ है॥ २७॥
तेषां दुरापं किं त्वन्यन्मर्त्यानां भगवत्पदम्।
भुवि लोलायुषो ये वै नैष्कर्म्यं साधयन्त्युत॥ २७
इस लोकमें कुछ ही दिनोंका जीवन होनेपर भी जो लोग भगवान्के परमपदकी प्राप्ति करानेवाला आत्मज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, उनके लिये संसारमें कौन पदार्थ दुर्लभ है॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.23.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 522) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/23/27/