वहाँ देवताओंके बाजे बजने लगे। उस समय उस मन्दराचलके शिखरपर वे देवांगनाएँ पुष्पोंकी वर्षा करती हुई आपसमें इस प्रकार कहने लगीं॥ २४॥
कुर्वत्यः कुसुमासारं तस्मिन्मन्दरसानुनि।
नदत्स्वमरतूर्येषु गृणन्ति स्म परस्परम्॥ २४
वहाँ देवताओंके बाजे बजने लगे। उस समय उस मन्दराचलके शिखरपर वे देवांगनाएँ पुष्पोंकी वर्षा करती हुई आपसमें इस प्रकार कहने लगीं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.23.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 522) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/23/24/