श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

नैव लक्षयते लोको लोकान् पर्यटतोऽपि यान्।

यथा सर्वदृशं सर्व आत्मानं येऽस्य हेतवः॥ ९

naiva lakṣayate loko lokān paryaṭato'pi yān|

yathā sarvadṛśaṃ sarva ātmānaṃ ye'sya hetavaḥ|| 9

अर्थ

इस दृश्य-प्रपंचके कारण महत्तत्त्वादि यद्यपि सर्वगत हैं, तो भी वे सर्वसाक्षी आत्माको नहीं देख सकते; इसी प्रकार यद्यपि आप समस्त लोकोंमें विचरते रहते हैं, तो भी अनधिकारीलोग आपको देख नहीं पाते॥ ९॥

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