श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.60

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

मातरिश्वेव सर्वात्मा बलेन सहसौजसा।

अविषह्यतया देवो भगवान् भूतराडिव॥ ६०

mātariśveva sarvātmā balena sahasaujasā|

aviṣahyatayā devo bhagavān bhūtarāḍiva|| 60

अर्थ

शारीरिक बल, इन्द्रियोंकी पटुता तथा पराक्रममें सर्वत्र गतिशील वायुके समान और तेजकी असह्यतामें भगवान् शंकरके समान थे॥ ६०॥

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