॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.22.44
प्राणा दाराः सुता ब्रह्मन् गृहाश्च सपरिच्छदाः।
राज्यं बलं मही कोश इति सर्वं निवेदितम्॥ ४४
prāṇā dārāḥ sutā brahman gṛhāśca saparicchadāḥ|
rājyaṃ balaṃ mahī kośa iti sarvaṃ niveditam|| 44
अर्थ
ब्रह्मन्! प्राण, स्त्री, पुत्र सब प्रकारकी सामग्रियोंसे भरा हुआ भवन, राज्य, सेना, पृथ्वी और कोश—यह सब कुछ आप ही लोगोंका है, अतः आपके ही श्रीचरणोंमें अर्पित है॥ ४४॥