इन चार पुरुषार्थोंमें भी सबसे श्रेष्ठ मोक्ष ही माना जाता है; क्योंकि अन्य तीन पुरुषार्थोंमें सर्वदा कालका भय लगा रहता है॥ ३५॥
तत्रापि मोक्ष एवार्थ आत्यन्तिकतयेष्यते।
त्रैवर्ग्योऽर्थो यतो नित्यं कृतान्तभयसंयुतः॥ ३५
इन चार पुरुषार्थोंमें भी सबसे श्रेष्ठ मोक्ष ही माना जाता है; क्योंकि अन्य तीन पुरुषार्थोंमें सर्वदा कालका भय लगा रहता है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.22.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 516) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/22/35/