॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.22.34
न कुर्यात्कर्हिचित्सङ्गं तमस्तीव्रं तितीरिषुः।
धर्मार्थकाममोक्षाणां यदत्यन्तविघातकम्॥ ३४
na kuryātkarhicitsaṅgaṃ tamastīvraṃ titīriṣuḥ|
dharmārthakāmamokṣāṇāṃ yadatyantavighātakam|| 34
अर्थ
इसलिये जिसे अज्ञानान्धकारसे पार होनेकी इच्छा हो, उस पुरुषको विषयोंमें आसक्ति कभी नहीं करनी चाहिये; क्योंकि यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्षकी प्राप्तिमें बड़ी बाधक है॥ ३४॥