श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.2

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तांस्तु सिद्धेश्‍वरान् राजा व्योम्नोऽवतरतोऽर्चिषा।

लोकानपापान् कुर्वत्या सानुगोऽचष्ट लक्षितान्॥ २

tāṃstu siddheśvarān rājā vyomno'vatarato'rciṣā|

lokānapāpān kurvatyā sānugo'caṣṭa lakṣitān|| 2

अर्थ

राजा और उनके अनुचरोंने देखा तथा पहचान लिया कि वे सिद्धेश्‍वर अपनी दिव्य कान्तिसे सम्पूर्ण लोकोंको पापनिर्मुक्त करते हुए आकाशसे उतरकर आ रहे हैं॥ २॥

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