तांस्तु सिद्धेश्वरान् राजा व्योम्नोऽवतरतोऽर्चिषा।
लोकानपापान् कुर्वत्या सानुगोऽचष्ट लक्षितान्॥ २
tāṃstu siddheśvarān rājā vyomno'vatarato'rciṣā|
lokānapāpān kurvatyā sānugo'caṣṭa lakṣitān|| 2
अर्थ
राजा और उनके अनुचरोंने देखा तथा पहचान लिया कि वे सिद्धेश्वर अपनी दिव्य कान्तिसे सम्पूर्ण लोकोंको पापनिर्मुक्त करते हुए आकाशसे उतरकर आ रहे हैं॥ २॥
तांस्तु सिद्धेश्वरान् राजा व्योम्नोऽवतरतोऽर्चिषा।
लोकानपापान् कुर्वत्या सानुगोऽचष्ट लक्षितान्॥ २
राजा और उनके अनुचरोंने देखा तथा पहचान लिया कि वे सिद्धेश्वर अपनी दिव्य कान्तिसे सम्पूर्ण लोकोंको पापनिर्मुक्त करते हुए आकाशसे उतरकर आ रहे हैं॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.22.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 512) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/22/2/