श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

संगमः खलु साधूनामुभयेषां च सम्मतः।

यत्सम्भाषणसम्प्रश्नः सर्वेषां वितनोति शम्॥ १९

saṃgamaḥ khalu sādhūnāmubhayeṣāṃ ca sammataḥ|

yatsambhāṣaṇasampraśnaḥ sarveṣāṃ vitanoti śam|| 19

अर्थ

सत्पुरुषोंका समागम श्रोता और वक्ता दोनोंको ही अभिमत होता है, क्योंकि उनके प्रश्नोत्तर सभीका कल्याण करते हैं॥ १९॥✎ 410

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #410 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् की → श्रीभगवान्‌की

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