श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.21.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

विदुर उवाच

सोऽभिषिक्तः पृथुर्विप्रैर्लब्धाशेषसुरार्हणः।

बिभ्रत् स वैष्णवं तेजो बाह्वोर्याभ्यां दुदोह गाम्॥ ९

so'bhiṣiktaḥ pṛthurviprairlabdhāśeṣasurārhaṇaḥ|

bibhrat sa vaiṣṇavaṃ tejo bāhvoryābhyāṃ dudoha gām|| 9

अर्थ

विदुरजी बोले—ब्रह्मन्! ब्राह्मणोंने पृथुका अभिषेक किया। समस्त देवताओंने उन्हें उपहार दिये। उन्होंने अपनी भुजाओंमें वैष्णव तेजको धारण किया और उससे पृथ्वीका दोहन किया॥ ९॥

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