॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.21.5
शङ्खदुन्दुभिघोषेण ब्रह्मघोषेण चर्त्विजाम्।
विवेश भवनं वीरः स्तूयमानो गतस्मयः॥ ५
śaṅkhadundubhighoṣeṇa brahmaghoṣeṇa cartvijām|
viveśa bhavanaṃ vīraḥ stūyamāno gatasmayaḥ|| 5
अर्थ
शंख और दुन्दुभि आदि बाजे बजने लगे, ऋत्विजगण वेदध्वनि करने लगे, वन्दीजनोंने स्तुतिगान आरम्भ कर दिया। यह सब देख और सुनकर भी उन्हें किसी प्रकारका अहंकार नहीं हुआ। इस प्रकार वीरवर पृथुने राजमहलमें प्रवेश किया॥ ५॥