श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.21.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

तस्य मे तदनुष्ठानाद्यानाहुर्ब्रह्मवादिनः।

लोकाः स्युः कामसन्दोहा यस्य तुष्यति दिष्टदृक्॥ २३

tasya me tadanuṣṭhānādyānāhurbrahmavādinaḥ|

lokāḥ syuḥ kāmasandohā yasya tuṣyati diṣṭadṛk|| 23

अर्थ

अतः इनका यथावत् पालन करनेसे मुझे उन्हीं मनोरथ पूर्ण करनेवाले लोकोंकी प्राप्ति होनी चाहिये, जो वेदवादी मुनियोंके मतानुसार सम्पूर्ण कर्मोंके साक्षी श्रीहरिके प्रसन्‍न होनेपर मिलते हैं॥ २३॥✎ 408

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #408 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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