श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.21.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

सर्वत्रास्खलितादेशः सप्तद्वीपैकदण्डधृक्।

अन्यत्र ब्राह्मणकुलादन्यत्राच्युतगोत्रतः॥ १२

sarvatrāskhalitādeśaḥ saptadvīpaikadaṇḍadhṛk|

anyatra brāhmaṇakulādanyatrācyutagotrataḥ|| 12

अर्थ

ब्राह्मणवंश और भगवान्‌के सम्बन्धी विष्णुभक्तोंको छोड़कर उनका सातों द्वीपोंके सभी पुरुषोंपर अखण्ड एवं अबाध शासन था॥ १२॥✎ 1332

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1332 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नक्षत्र-मण्डलमें → नक्षत्रमण्डलमें

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