श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.2.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

श्रूयतां ब्रह्मर्षयो मे सहदेवाः सहाग्नयः।

साधूनां ब्रुवतो वृत्तं नाज्ञानान्‍न च मत्सरात्॥ ९

śrūyatāṃ brahmarṣayo me sahadevāḥ sahāgnayaḥ|

sādhūnāṃ bruvato vṛttaṃ nājñānānna ca matsarāt|| 9

अर्थ

‘देवता और अग्‍नियोंके सहित समस्त ब्रह्मर्षिगण मेरी बात सुनें। मैं नासमझी या द्वेषवश नहीं कहता, बल्कि शिष्टाचारकी बात कहता हूँ॥ ९॥

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