॥ श्रीहरिः ॥
अयं तु लोकपालानां यशोघ्नो निरपत्रपः।
सद्भिराचरितः पन्था येन स्तब्धेन दूषितः॥ १०
ayaṃ tu lokapālānāṃ yaśoghno nirapatrapaḥ|
sadbhirācaritaḥ panthā yena stabdhena dūṣitaḥ|| 10
अर्थ
यह निर्लज्ज महादेव समस्त लोकपालोंकी पवित्र कीर्तिको धूलमें मिला रहा है। देखिये, इस घमण्डीने सत्पुरुषोंके आचरणको लांछित एवं मटियामेट कर दिया है॥ १०॥
अयं तु लोकपालानां यशोघ्नो निरपत्रपः।
सद्भिराचरितः पन्था येन स्तब्धेन दूषितः॥ १०
यह निर्लज्ज महादेव समस्त लोकपालोंकी पवित्र कीर्तिको धूलमें मिला रहा है। देखिये, इस घमण्डीने सत्पुरुषोंके आचरणको लांछित एवं मटियामेट कर दिया है॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.2.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 412) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/2/10/