श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.19.37

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

भवान् परित्रातुमिहावतीर्णो

धर्मं जनानां समयानुरूपम्।

वेनापचारादवलुप्तमद्य

तद्देहतो विष्णुकलासि वैन्य॥ ३७

bhavān paritrātumihāvatīrṇo

dharmaṃ janānāṃ samayānurūpam|

venāpacārādavaluptamadya

taddehato viṣṇukalāsi vainya|| 37

अर्थ

आप साक्षात् विष्णुके अंश हैं। वेनके दुराचारसे धर्म लुप्त हो रहा था, उस समयोचित धर्मकी रक्षाके लिये ही आपने उसके शरीरसे अवतार लिया है॥ ३७॥

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