इन्द्रने अश्वहरणकी इच्छासे जो-जो रूप धारण किये थे, वे पापके खण्ड होनेके कारण पाखण्ड कहलाये। यहाँ ‘खण्ड’ शब्द चिह्नका वाचक है॥ २३॥✎ 402403
यानि रूपाणि जगृहे इन्द्रो हयजिहीर्षया।
तानि पापस्य खण्डानि लिंगं खण्डमिहोच्यते॥ २३
इन्द्रने अश्वहरणकी इच्छासे जो-जो रूप धारण किये थे, वे पापके खण्ड होनेके कारण पाखण्ड कहलाये। यहाँ ‘खण्ड’ शब्द चिह्नका वाचक है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 498) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)