अत्रि मुनिने फिर उन्हें आकाशमें तेजीसे जाते दिखा दिया, किन्तु उनके पास कपाल और खट्वांग देखकर पृथुपुत्रने उनके मार्गमें कोई बाधा न डाली॥ २०॥✎ 402403
अत्रिः सन्दर्शयामास त्वरमाणं विहायसा।
कपालखट्वांगधरं वीरो नैनमबाधत॥ २०
अत्रि मुनिने फिर उन्हें आकाशमें तेजीसे जाते दिखा दिया, किन्तु उनके पास कपाल और खट्वांग देखकर पृथुपुत्रने उनके मार्गमें कोई बाधा न डाली॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 498) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)