श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.19.18

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तत्तस्य चाद्भुतं कर्म विचक्ष्य परमर्षयः।

नामधेयं ददुस्तस्मै विजिताश्‍व इति प्रभो॥ १८

tattasya cādbhutaṃ karma vicakṣya paramarṣayaḥ|

nāmadheyaṃ dadustasmai vijitāśva iti prabho|| 18

अर्थ

शक्तिशाली विदुरजी! उसके इस अद्भुत पराक्रमको देखकर महर्षियोंने उसका नाम विजिताश्‍व रखा॥ १८॥

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