श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

यदाभिषिक्तः पृथुरंग विप्रै-

रामन्त्रितो जनतायाश्‍च पालः।

प्रजा निरन्‍ने क्षितिपृष्ठ एत्य

क्षुत्क्षामदेहाः पतिमभ्यवोचन्॥ ९

yadābhiṣiktaḥ pṛthuraṃga viprai-

rāmantrito janatāyāśca pālaḥ|

prajā niranne kṣitipṛṣṭha etya

kṣutkṣāmadehāḥ patimabhyavocan|| 9

अर्थ

श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! ब्राह्मणोंने महाराज पृथुका राज्याभिषेक करके उन्हें प्रजाका रक्षक उद्घोषित किया। इन दिनों पृथ्वी अन्‍नहीन हो गयी थी, इसलिये भूखके कारण प्रजाजनोंके शरीर सूखकर काँटे हो गये थे। उन्होंने अपने स्वामी पृथुके पास आकर कहा॥ ९॥

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