tasyāmevaṃ hi duṣṭāyāṃ daṇḍo nātra na śasyate|| 23
अर्थ
तू जो प्रतिदिन हरी-हरी घास खा जाती है और अपने थनका दूध नहीं देती—ऐसी दुष्टता करनेपर तुझे दण्ड देना अनुचित नहीं कहा जा सकता॥ २३॥✎ 393394395396397398399
यवसं जग्ध्यनुदिनं नैव दोग्ध्यौधसं पयः।
तस्यामेवं हि दुष्टायां दण्डो नात्र न शस्यते॥ २३
तू जो प्रतिदिन हरी-हरी घास खा जाती है और अपने थनका दूध नहीं देती—ऐसी दुष्टता करनेपर तुझे दण्ड देना अनुचित नहीं कहा जा सकता॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.17.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 491) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/17/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (7)