ये प्रजापालक राजाधिराज होकर प्रजाके जीवन-निर्वाहके लिये गोरूपधारिणी पृथ्वीका दोहन करेंगे और इन्द्रके समान अपने धनुषके कोनोंसे बातोंकी-बातमें पर्वतोंको तोड़-फोड़कर पृथ्वीको समतल कर देंगे॥ २२॥✎ 1604
अयं महीं गां दुदुहेऽधिराजः
प्रजापतिर्वृत्तिकरः प्रजानाम्।
यो लीलयाद्रीन् स्वशरासकोट्या
भिन्दन् समां गामकरोद्यथेन्द्रः॥ २२
ये प्रजापालक राजाधिराज होकर प्रजाके जीवन-निर्वाहके लिये गोरूपधारिणी पृथ्वीका दोहन करेंगे और इन्द्रके समान अपने धनुषके कोनोंसे बातोंकी-बातमें पर्वतोंको तोड़-फोड़कर पृथ्वीको समतल कर देंगे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 488) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/16/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)