श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.16.21

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अस्मै नृपालाः किल तत्र तत्र

बलिं हरिष्यन्ति सलोकपालाः।

मंस्यन्त एषां स्त्रिय आदिराजं

चक्रायुधं तद्यश उद्धरन्त्यः॥ २१

asmai nṛpālāḥ kila tatra tatra

baliṃ hariṣyanti salokapālāḥ|

maṃsyanta eṣāṃ striya ādirājaṃ

cakrāyudhaṃ tadyaśa uddharantyaḥ|| 21

अर्थ

उस समय जहाँ-तहाँ सभी लोकपाल और पृथ्वीपाल इन्हें भेंटें समर्पण करेंगे, उनकी स्त्रियाँ इनका गुणगान करेंगी और इन आदिराजको साक्षात् श्रीहरि ही समझेंगी॥ २१॥

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