श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.15.5

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

इयं च सुदती देवी गुणभूषणभूषणा।

अर्चिर्नाम वरारोहा पृथुमेवावरुन्धती॥ ५

iyaṃ ca sudatī devī guṇabhūṣaṇabhūṣaṇā|

arcirnāma varārohā pṛthumevāvarundhatī|| 5

अर्थ

यह सुन्दर दाँतोंवाली एवं गुण और आभूषणोंको भी विभूषित करनेवाली सुन्दरी इन पृथुको ही अपना पति बनायेगी। इसका नाम अर्चि होगा॥ ५॥✎ 390 1997

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #390 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1997 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दाँतोवाली → दाँतोंवाली

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