जगद्गुरु ब्रह्माजी देवता और देवेश्वरोंके साथ पधारे। उन्होंने वेनकुमार पृथुके दाहिने हाथमें भगवान् विष्णुकी हस्तरेखाएँ और चरणोंमें कमलका चिह्न देखकर उन्हें श्रीहरिका ही अंश समझा; क्योंकि जिसके हाथमें दूसरी रेखाओंसे बिना कटा हुआ चक्रका चिह्न होता है, वह भगवान्का ही अंश होता है॥ ९-१०॥
यह अर्थ श्लोक 9–10 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
पादयोररविन्दं च तं वै मेने हरेः कलाम्।
यस्याप्रतिहतं चक्रमंशः स परमेष्ठिनः॥ १०
जगद्गुरु ब्रह्माजी देवता और देवेश्वरोंके साथ पधारे। उन्होंने वेनकुमार पृथुके दाहिने हाथमें भगवान् विष्णुकी हस्तरेखाएँ और चरणोंमें कमलका चिह्न देखकर उन्हें श्रीहरिका ही अंश समझा; क्योंकि जिसके हाथमें दूसरी रेखाओंसे बिना कटा हुआ चक्रका चिह्न होता है, वह भगवान्का ही अंश होता है॥ ९-१०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.15.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 483) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/15/10/