श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

वेन उवाच

बालिशा बत यूयं वा१ अधर्मे धर्ममानिनः।

ये वृत्तिदं पतिं हित्वा जारं पतिमुपासते॥ २३

bāliśā bata yūyaṃ vā adharme dharmamāninaḥ|

ye vṛttidaṃ patiṃ hitvā jāraṃ patimupāsate|| 23

अर्थ

वेनने कहा—तुमलोग बड़े मूर्ख हो! खेद है, तुमने अधर्ममें ही धर्मबुद्धि कर रखी है। तभी तो तुम जीविका देनेवाले मुझ साक्षात् पतिको छोड़कर किसी दूसरे जारपतिकी उपासना करते हो॥ २३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—वै।

    (मुद्रित पृष्ठ 480)

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