इसलिये वीरवर! प्रजाका कल्याणरूप वह धर्म आपके कारण नष्ट नहीं होना चाहिये। धर्मके नष्ट होनेसे राजा भी ऐश्वर्यसे च्युत हो जाता है॥ १६॥
स ते मा विनशेद्वीर प्रजानां क्षेमलक्षणः।
यस्मिन् विनष्टे नृपतिरैश्वर्यादवरोहति॥ १६
इसलिये वीरवर! प्रजाका कल्याणरूप वह धर्म आपके कारण नष्ट नहीं होना चाहिये। धर्मके नष्ट होनेसे राजा भी ऐश्वर्यसे च्युत हो जाता है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 479) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/16/