हमने इसे प्रजाकी रक्षा करनेके लिये नियुक्त किया था, यह आज उसीको नष्ट करनेपर तुला हुआ है। इतना सब होनेपर भी हमें इसे समझाना अवश्य चाहिये; ऐसा करनेसे इसके किये हुए पाप हमें स्पर्श नहीं करेंगे॥ ११॥✎ 1602
निरूपितः प्रजापालः स जिघांसति वै प्रजाः।
तथापि सान्त्वयेमामुं नास्मांस्तत्पातकं स्पृशेत्॥ ११
हमने इसे प्रजाकी रक्षा करनेके लिये नियुक्त किया था, यह आज उसीको नष्ट करनेपर तुला हुआ है। इतना सब होनेपर भी हमें इसे समझाना अवश्य चाहिये; ऐसा करनेसे इसके किये हुए पाप हमें स्पर्श नहीं करेंगे॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 479) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/14/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)