आपका कल्याण हो! इसलिये पहले आप सुपुत्र प्राप्त करनेका कोई उपाय कीजिये। यदि आप पुत्रकी कामनासे यज्ञ करेंगे, तो भगवान् यज्ञेश्वर आपको अवश्य पुत्र प्रदान करेंगे ॥ ३२॥✎ 1601
तथा साधय भद्रं ते आत्मानं सुप्रजं नृप।
इष्टस्ते पुत्रकामस्य पुत्रं दास्यति यज्ञभुक्॥ ३२
आपका कल्याण हो! इसलिये पहले आप सुपुत्र प्राप्त करनेका कोई उपाय कीजिये। यदि आप पुत्रकी कामनासे यज्ञ करेंगे, तो भगवान् यज्ञेश्वर आपको अवश्य पुत्र प्रदान करेंगे ॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)