भगवद्भक्त ध्रुवके इस पवित्र चरित्रको जो श्रद्धापूर्वक बार-बार सुनते हैं, उन्हें भगवान्की भक्ति प्राप्त होती है, जिससे उनके सभी दुःखोंका नाश हो जाता है॥ ४६॥✎ 384
श्रुत्वैतच्छ्रद्धयाभीक्ष्णमच्युतप्रियचेष्टितम्।
भवेद्भक्तिर्भगवति यया स्यात्क्लेशसंक्षयः॥ ४६
भगवद्भक्त ध्रुवके इस पवित्र चरित्रको जो श्रद्धापूर्वक बार-बार सुनते हैं, उन्हें भगवान्की भक्ति प्राप्त होती है, जिससे उनके सभी दुःखोंका नाश हो जाता है॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 472) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/12/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)