बेटा! तुम्हारा अपने भाईपर बड़ा अनुराग था, यह तो ठीक है; परन्तु देखो, उसके वधसे सन्तप्त होकर तुमने एक यक्षके अपराध करनेपर प्रसंगवश कितनोंकी हत्या कर डाली॥ ९॥
नन्वेकस्यापराधेन प्रसंगाद् बहवो हताः।
भ्रातुर्वधाभितप्तेन त्वयांग भ्रातृवत्सल॥ ९
बेटा! तुम्हारा अपने भाईपर बड़ा अनुराग था, यह तो ठीक है; परन्तु देखो, उसके वधसे सन्तप्त होकर तुमने एक यक्षके अपराध करनेपर प्रसंगवश कितनोंकी हत्या कर डाली॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.11.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 464) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/11/9/