एवं स्वायम्भुवः पौत्रमनुशास्य मनुर्ध्रुवम्।
तेनाभिवन्दितः साकमृषिभिः स्वपुरं ययौ॥ ३५
इस प्रकार स्वायम्भुव मनुने अपने पौत्र ध्रुवको शिक्षा दी। तब ध्रुवजीने उन्हें प्रणाम किया। इसके पश्चात् वे महर्षियोंके सहित अपने लोकको चले गये॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.11.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 467) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/11/35/