इसलिये बेटा! जबतक कि महापुरुषोंका तेज हमारे कुलको आक्रान्त नहीं कर लेता; इसके पहले ही विनम्र भाषण और विनयके द्वारा शीघ्र उन्हें प्रसन्न कर लो॥ ३४॥
तं प्रसादय वत्साशु सन्नत्या प्रश्रयोक्तिभिः।
न यावन्महतां तेजः कुलं नोऽभिभविष्यति॥ ३४
इसलिये बेटा! जबतक कि महापुरुषोंका तेज हमारे कुलको आक्रान्त नहीं कर लेता; इसके पहले ही विनम्र भाषण और विनयके द्वारा शीघ्र उन्हें प्रसन्न कर लो॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.11.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 467) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/11/34/