श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.10.6

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

दध्मौ शङ्खं बृहद‍्बाहुः खं दिशश्चानुनादयन्।

येनोद्विग्नदृशः क्षत्तरुपदेव्योऽत्रसन्भृशम्॥ ६

dadhmau śaṅkhaṃ bṛhadbāhuḥ khaṃ diśaścānunādayan|

yenodvignadṛśaḥ kṣattarupadevyo'trasanbhṛśam|| 6

अर्थ

विदुरजी! वहाँ पहुँचकर महाबाहु ध्रुवने अपना शंख बजाया तथा सम्पूर्ण आकाश और दिशाओंको गुँजा दिया। उस शंखध्वनिसे यक्ष-पत्नियाँ बहुत ही डर गयीं, उनकी आँखें भयसे कातर हो उठीं॥ ६॥

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