श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.10.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ततः परिघनिस्त्रिंशैः प्रासशूलपरश्‍वधैः।

शक्त्यृष्टिभिर्भुशुण्डीभिश्चित्रवाजैः शरैरपि॥ ११

tataḥ parighanistriṃśaiḥ prāsaśūlaparaśvadhaiḥ|

śaktyṛṣṭibhirbhuśuṇḍībhiścitravājaiḥ śarairapi|| 11

अर्थ

यक्षोंकी संख्या तेरह अयुत (१,३०,०००) थी। उन्होंने ध्रुवजीका बदला लेनेके लिये अत्यन्त कुपित होकर रथ और सारथीके सहित उनपर परिघ, खड्ग, प्रास, त्रिशूल, फरसा, शक्ति, ऋष्टि, भुशुण्डी तथा चित्र-विचित्र पंखदार बाणोंकी वर्षा की॥ ११-१२॥

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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