श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.7

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तोषः प्रतोषः सन्तोषो भद्रः शान्तिरिडस्पतिः।

इध्मः कविर्विभुः स्वह्नः सुदेवो रोचनो द्विषट्॥ ७

toṣaḥ pratoṣaḥ santoṣo bhadraḥ śāntiriḍaspatiḥ|

idhmaḥ kavirvibhuḥ svahnaḥ sudevo rocano dviṣaṭ|| 7

अर्थ

उनके नाम हैं—तोष, प्रतोष, सन्तोष, भद्र, शान्ति, इडस्पति, इध्म, कवि, विभु, स्वह्न, सुदेव और रोचन॥ ७॥✎ 353 354 355

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #353 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #354 शब्दोंके बीचका स्थान: यज्ञभगवान् को → यज्ञभगवान्‌को
  • #355 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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