॥ श्रीहरिः ॥
पुलहस्य गतिर्भार्या त्रीनसूत सती सुतान्।
कर्मश्रेष्ठं वरीयांसं सहिष्णुं च महामते॥ ३८
pulahasya gatirbhāryā trīnasūta satī sutān|
karmaśreṣṭhaṃ varīyāṃsaṃ sahiṣṇuṃ ca mahāmate|| 38
अर्थ
महामते! महर्षि पुलहकी स्त्री परम साध्वी गतिसे कर्मश्रेष्ठ, वरीयान् और सहिष्णु—ये तीन पुत्र उत्पन्न हुए॥ ३८॥
पुलहस्य गतिर्भार्या त्रीनसूत सती सुतान्।
कर्मश्रेष्ठं वरीयांसं सहिष्णुं च महामते॥ ३८
महामते! महर्षि पुलहकी स्त्री परम साध्वी गतिसे कर्मश्रेष्ठ, वरीयान् और सहिष्णु—ये तीन पुत्र उत्पन्न हुए॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 409) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/38/