॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.1.23
तत्प्रादुर्भावसंयोगविद्योतितमना मुनिः।
उत्तिष्ठन्नेकपादेन ददर्श विबुधर्षभान्॥ २३
tatprādurbhāvasaṃyogavidyotitamanā muniḥ|
uttiṣṭhannekapādena dadarśa vibudharṣabhān|| 23
अर्थ
उन तीनोंका एक ही साथ प्रादुर्भाव होनेसे अत्रि मुनिका अन्तःकरण प्रकाशित हो उठा। उन्होंने एक पैरसे खड़े-खड़े ही उन देवदेवोंको देखा और फिर पृथ्वीपर दण्डके समान लोटकर प्रणाम करनेके अनन्तर अर्घ्य-पुष्पादि पूजनकी सामग्री हाथमें ले उनकी पूजा की। वे तीनों अपने-अपने वाहन—हंस, गरुड और बैलपर चढ़े हुए तथा अपने कमण्डलु, चक्र, त्रिशूलादि चिह्नोंसे सुशोभित थे॥ २३-२४॥