‘मेरा आश्रय कोई है या नहीं’ इस सन्देहसे तुम कमलनालके द्वारा जलमें उसका मूल खोज रहे थे, सो मैंने तुम्हें अपना यह स्वरूप अन्तःकरणमें ही दिखलाया है॥ ३७॥
तुभ्यं मद्विचिकित्सायामात्मा मे दर्शितोऽबहिः।
नालेन सलिले मूलं पुष्करस्य विचिन्वतः॥ ३७
‘मेरा आश्रय कोई है या नहीं’ इस सन्देहसे तुम कमलनालके द्वारा जलमें उसका मूल खोज रहे थे, सो मैंने तुम्हें अपना यह स्वरूप अन्तःकरणमें ही दिखलाया है॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.9.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 277) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/9/37/