श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.37

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तुभ्यं मद्विचिकित्सायामात्मा मे द५र्शितोऽबहिः।

नालेन सलिले मूलं पुष्करस्य विचिन्वतः॥ ३७

tubhyaṃ madvicikitsāyāmātmā me darśito'bahiḥ|

nālena salile mūlaṃ puṣkarasya vicinvataḥ|| 37

अर्थ

‘मेरा आश्रय कोई है या नहीं’ इस सन्देहसे तुम कमलनालके द्वारा जलमें उसका मूल खोज रहे थे, सो मैंने तुम्हें अपना यह स्वरूप अन्तःकरणमें ही दिखलाया है॥ ३७॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    प्रा० पा०—संदर्शि०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 277)

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