श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.34

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

नानाकर्मवितानेन प्रजा बह्वीः सिसृक्षतः।

नात्मावसीदत्यस्मिंस्ते व४र्षीयान्मदनुग्रहः॥ ३४

nānākarmavitānena prajā bahvīḥ sisṛkṣataḥ|

nātmāvasīdatyasmiṃste varṣīyānmadanugrahaḥ|| 34

अर्थ

ब्रह्माजी! नाना प्रकारके कर्मसंस्कारोंके अनुसार अनेक प्रकारकी जीवसृष्टिको रचनेकी इच्छा होनेपर भी तुम्हारा चित्त मोहित नहीं होता, यह मेरी अतिशय कृपाका ही फल है॥ ३४॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्रा० पा०—वरीयान्।

    (मुद्रित पृष्ठ 277)

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