॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.8.1
अथाष्टमोऽध्यायः
ब्रह्माजीकी उत्पत्ति
मैत्रेय उवाच
सत्सेवनीयो बत पूरुवंशो
यल्लोकपालो भगवत्प्रधानः।
बभूविथेहाजितकीर्तिमालां
पदे पदे नूतनयस्यभीक्ष्णम्॥ १
satsevanīyo bata pūruvaṃśo
yallokapālo bhagavatpradhānaḥ|
babhūvithehājitakīrtimālāṃ
pade pade nūtanayasyabhīkṣṇam|| 1
अर्थ
श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! आप भगवद्भक्तोंमें प्रधान लोकपाल यमराज ही हैं; आपके पूरुवंशमें जन्म लेनेके कारण वह वंश साधुपुरुषोंके लिये भी सेव्य हो गया है। धन्य हैं! आप निरन्तर पद-पदपर श्रीहरिकी कीर्तिमयी मालाको नित्य नूतन बना रहे हैं॥ १॥ अब मैं, क्षुद्र विषय-सुखकी कामनासे महान् दुःखको मोल लेनेवाले पुरुषोंकी दुःखनिवृत्तिके लिये, श्रीमद्भागवतपुराण प्रारम्भ करता हूँ—जिसे स्वयं श्रीसंकर्षणभगवान्ने सनकादि ऋषियोंको सुनाया था॥ २॥ ✎ 232 1588