दान, तप तथा इष्ट और पूर्त कर्मोंका क्या फल है? प्रवास और आपत्तिके समय मनुष्यका क्या धर्म होता है?॥ ३४॥
दानस्य तपसो वापि यच्चेष्टापूर्तयोः फलम्।
प्रवासस्थस्य यो धर्मो यश्च पुंस उतापदि॥ ३४
दान, तप तथा इष्ट और पूर्त कर्मोंका क्या फल है? प्रवास और आपत्तिके समय मनुष्यका क्या धर्म होता है?॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.7.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 266) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/7/34/