॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.7.28
गुणावतारैर्विश्वस्य सर्गस्थित्यप्ययाश्रयम्।
सृजतः श्रीनिवासस्य व्याचक्ष्वोदारविक्रमम्॥ २८
guṇāvatārairviśvasya sargasthityapyayāśrayam|
sṛjataḥ śrīnivāsasya vyācakṣvodāravikramam|| 28
अर्थ
श्रीहरिने सृष्टि करते समय जगत्की उत्पत्ति, स्थिति और संहारके लिये अपने गुणावतार ब्रह्मा, विष्णु और महादेवरूपसे जो कल्याणकारी लीलाएँ कीं, उनका भी वर्णन कीजिये॥ २८॥✎ 231