श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.13

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

यदेन्द्रियोपरामोऽथ द्रष्ट्रात्मनि परे हरौ।

विलीयन्ते तदा क्लेशाः संसुप्तस्येव कृत्स्नशः॥ १३

yadendriyoparāmo'tha draṣṭrātmani pare harau|

vilīyante tadā kleśāḥ saṃsuptasyeva kṛtsnaśaḥ|| 13

अर्थ

जिस समय समस्त इन्द्रियाँ विषयोंसे हटकर साक्षी परमात्मा श्रीहरिमें निश्‍चलभावसे स्थित हो जाती हैं, उस समय गाढ़ निद्रामें सोये हुए मनुष्यके समान जीवके राग-द्वेषादि सारे क्लेश सर्वथा नष्ट हो जाते हैं॥ १३॥

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