यह अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवरूपसे तीन प्रकारका, प्राणरूपसे दस प्रकारका* और हृदयरूपसे एक प्रकारका है॥ ९॥✎ 21621721821913001301
साध्यात्मः साधिदैवश्च साधिभूत इति त्रिधा।
विराट् प्राणो दशविध एकधा हृदयेन च॥ ९
यह अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवरूपसे तीन प्रकारका, प्राणरूपसे दस प्रकारका और हृदयरूपसे एक प्रकारका है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 259) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/6/9/
टिप्पणियाँ
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दस इन्द्रियोंसहित मन अध्यात्म है, इन्द्रियादिके विषय अधिभूत हैं, इन्द्रियाधिष्ठाता देव अधिदैव हैं तथा प्राण, अपान, उदान, समान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय—ये दस प्राण हैं।