फिर विराट् पुरुषके गुदा प्रकट हुई; उसमें लोकपाल मित्रने अपने अंश पायु-इन्द्रियके सहित प्रवेश किया, इससे जीव मलत्याग करता है॥ २०॥✎ 220
गुदं पुंसो विनिर्भिन्नं मित्रो लोकेश आविशत्।
पायुनांशेन येनासौ विसर्गं प्रतिपद्यते॥ २०
फिर विराट् पुरुषके गुदा प्रकट हुई; उसमें लोकपाल मित्रने अपने अंश पायु-इन्द्रियके सहित प्रवेश किया, इससे जीव मलत्याग करता है॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.6.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 260) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/6/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#220 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने